भारत में खेती आज भी करोड़ों किसानों की आजीविका का सबसे बड़ा साधन है खासकर धान की खेती देश के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर की जाती है. लेकिन बदलते मौसम, मिट्टी की घटती उर्वरता और बढ़ती लागत के कारण किसानों को उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिल पाता, ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि धान की बुवाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं. यह छोटा सा कदम किसानों के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकता है,



विशेषज्ञों का कहना है कि बिना मिट्टी की जांच किए खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करने से खेत की उर्वरता धीरे-धीरे कम हो जाती है कई बार किसान जरूरत से ज्यादा या कम मात्रा में खाद डाल देते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं मिट्टी की जांच से यह पता चलता है कि खेत में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है और किस प्रकार की खाद की जरूरत है इससे किसान सही मात्रा में उर्वरक का उपयोग कर सकते हैं,

धान की फसल में सही पोषण मिलने से पौधे मजबूत होते हैं और बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है. इससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ किसानों की लागत भी कम होती है. कृषि विभाग के अनुसार वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान कम खर्च में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं,

आज के समय में आधुनिक खेती ही किसानों की सफलता की कुंजी बन चुकी है. यदि किसान समय रहते मिट्टी की जांच करवाकर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें, आपकी पैदावार अपने आप बढ़ जाएगी.

खेत की तैयारी और उर्वरक प्रबंधनजुताई: 

खेत में पानी भरकर (पडलिंग) 2-3 बार गहरी जुताई करें。मिट्टी को भुरभुरा और समतल बनाएं।बेसल डोज: बुवाई/रोपाई के समय प्रति एकड़ 40-50 किलो डीएपी (DAP) का उपयोग करें खरपतवार नियंत्रण: सीधी बुवाई में खरपतवार रोकने के लिए बुवाई के तुरंत बाद पेंडीमथालीन का स्प्रे करें